पेरिस 2024 ओलंपिक हॉकी: भारत ने स्पेन पर 2-1 की जीत के साथ कांस्य पदक हासिल किया

Paris 2024 Olympics Hockey: India Secures Bronze Medal with 2-1 Victory Over Spain

पेरिस 2024 ओलंपिक हॉकी पेरिस 2024 ओलंपिक में एक रोमांचक मुकाबले में, भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने स्पेन पर 2-1 की कड़ी जीत के बाद कांस्य पदक जीता। यवेस-डू-मैनोर स्टेडियम में खेले गए इस मैच ने भारतीय हॉकी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि टीम ने इस खेल में अपना 13वां … Read more

नीरज चोपड़ा ने पेरिस 2024 ओलंपिक भाला फेंक में रजत जीता; अरशद नदीम ने स्वर्ण पदक का रिकॉर्ड तोड़ा

Neeraj Chopra Wins Silver at Paris 2024 Olympics Javelin Throw; Arshad Nadeem Breaks Record for Gold

पेरिस 2024 ओलंपिक में ऐतिहासिक और कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले भाला फेंक फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत पदक जीता, जबकि पाकिस्तान के अरशद नदीम ने स्वर्ण पदक जीतने के लिए ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ा। इस आयोजन में असाधारण प्रदर्शन देखने को मिले, जिसमें प्रथम प्रयास में नदीम काफी नर्वस दिख रहा था लेकिन अपने … Read more

जब तक समाज में छुआछूत है तब तक आरक्षण में क्रीमी लेयर की बात उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले चिराग पासवान!

As long as there is untouchability in society, it is not right to talk about creamy layer in reservation. Chirag Paswan spoke on the Supreme Court's decision!

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिया गया फैसला अब केंद्र सरकार के लिए भी मुसीबत बनता जा रहा है। फैसले के बाद से ही दलित समुदाय तथा बहुजन संगठनों ने इसकी आलोचना करना शुरू कर दिया था। साथ ही दलित समुदाय के लोगों ने केंद्र … Read more

शहीद उधम सिंह के बलिदान को इतिहास में वह जगह क्यों नहीं मिल पाया जो औरों को मिला?

Why did the sacrifice of Shaheed Udham Singh not get the place in history that others got?

यूं तो अगस्त का महीना को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इसी महीने के 15 तारीख को हमारा देश सैकड़ो साल के गुलामी की दास्तां से मुक्त हुए थे। आपको बता दें कि एक लंबी लड़ाई और संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद … Read more

आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन योजना नहीं है। एससी-एसटी के आरक्षण में वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले तेजस्वी यादव

Reservation is not a poverty alleviation scheme. Tejashwi Yadav spoke on the Supreme Court's decision regarding the classification of SC-ST reservations

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा वर्तमान में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि – “आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन योजना नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने छुआछूत और गैर बराबरी दूर करने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान दिया था। इसमें आर्थिक आधार या क्रीमी लेयर की बातें कहां से आ गई? उन्होंने अदालत के फैसले पर सवाल करते हुए कहा कि – यदि कोई दलित समुदाय के लोग किसी बड़े पद पर नौकरी हासिल कर लेते हैं, तो क्या इससे उनका जातिगत पहचान दूर हो जाता है? उन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ो उदाहरण है कि बड़े बड़े पद पर आसीन पदाधिकारियों के साथ जातिगत भेदभाव होता है जो दलित समुदाय से आते हैं।

अनुसूचित जाति के आरक्षण में उप वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ इन संगठनों ने 21 अगस्त को भारत बंद का ऐलान किया।

Many organisations called for a Bharat Bandh on August 21 against the Supreme Court's decision on sub-classification in reservation for Scheduled Castes.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में देश भर के तमाम दलित और बहुजन संगठनों ने 21 अगस्त को देशव्यापी बंद की घोषणा की है। सामाजिक और दलित मुद्दे पर मुखरता से अपनी बात रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सतपाल तंवर ने बताया कि – बहुजन संगठनों द्वारा बुलाया गया … Read more

अनुसूचित जाति के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चंद्रशेखर आजाद ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

Chandrashekhar Azad gave his reaction on the Supreme Court's decision regarding reservation for Scheduled Castes.

संसद चंद्रशेखर आजाद के साथ-साथ कई ऐसे सामाजिक न्याय के पक्षधर व्यक्तियों ने इस बात पर जोर दिया कि – यदि हमारे न्यायपालिका को लगता है कि दलित समुदाय में किसी एक जाति के हक को कोई दूसरा खा रहा है तो इसकी शुरुआत अदालत अपने यहां से ही करे। अदालत को यह आंकड़ा जारी करना चाहिए कि आज तक सर्वोच्च न्यायालय में कितने जज एससी, एसटी या ओबीसी से है। वहीं कई लोग इस बेंच में शामिल जजों की मंशा पर भी सवाल खड़ा कर दिया और सवाल करने लगे कि – सबसे पहले यह पता चलना चाहिए कि इस बेंच में शामिल जजों में कौन-कौन किस पृष्ठभूमि से आते हैं?

अनुसूचित जातियों को उप-वर्गीकृत करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Supreme Court's decision to sub-classify Scheduled Castes

न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी ने अपनी असहमति में तर्क दिया कि एससी समुदाय को एक समरूप समूह के रूप में माना जाना चाहिए और राज्य को एससी की राष्ट्रपति सूची में छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एससी के लिए आरक्षण प्रावधानों में कोई भी बदलाव केवल राष्ट्रपति की अधिसूचना के माध्यम से किया जाना चाहिए, उन्होंने राजनीतिक कारणों से राज्यों के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी। इस मामले में ई.वी. चिन्नैया के फैसले पर फिर से विचार किया गया, जिसने निष्कर्ष निकाला था कि सभी एससी समुदाय, सदियों से बहिष्कार से पीड़ित होने के कारण एक समरूप वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है।

बाल गंगाधर तिलक पुण्यतिथि : आधुनिक भारत में तिलक के विचार कितने प्रासंगिक है?

Bal Gangadhar Tilak Death Anniversary: ​​How relevant are Tilak's ideas in modern India?

वही बाल गंगाधर तिलक ने महिला शिक्षा का पूरी क्षमता के साथ विरोध किया उन्होंने 1881 से 1920 के बीच जगह-जगह जाकर और कार्यक्रम करके महिला शिक्षा का पुरजोर विरोध किया था महिला शिक्षा के विरोध में बाल गंगाधर तिलक लिखते हैं कि– “महिलाएं कमजोर होती है और संतति को बढ़ाना ही उसका काम होता है। इसलिए उसको शिक्षित करने से उनको पीड़ा होगी। क्योंकि आधुनिक शिक्षा को समझना उनके शक्ति से बाहर की बात है।” तिलक ने यह बात अपने अखबार मराठा में 31 अगस्त 1884 में प्रकाशित किया था।

कौन है अभिषेक पांडे, जिन्होंने मध्य प्रदेश में आदिवासियों की निर्मम हत्या की?

Who is Abhishek Pandey, who brutally murdered tribals in Madhya Pradesh?

मध्य प्रदेश में एक बार फिर आदिवासियों के ऊपर उत्पीड़न और प्रताड़ना की खबर सामने आई है। आपको बता दें कि इसी मध्य प्रदेश में पिछली बार एक आदिवासी युवक के ऊपर प्रवेश शुक्ला नामक युवक ने पेशाब कर दिया था। उस घटना का वीडियो बनाकर वायरल भी किया। बाद में पता चला कि प्रवेश … Read more

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